Friday, October 2, 2015

कविता - मन हे ...!

कविता - मन हे ...!
-अरुण वि .देशपांडे .
----------------------------------------------------------
धुक्यात हरवलेल्या वाटा
शोधिते शोधिते मन वेडे 
क्षितिजा पर्यंत वाटा असती
धावते तिथ पर्यंत वेडे .....!
निळ्याशार निरभ्र अंबरी
मनपाखरू फिरे भिरभिरी
सायंकाळी संधिप्रकाशात
फिरे माघारी मग मन वेडे ...!
पहाटेच्या कोवळ्या उन्हात
होई पुन्हा रोज ताजेतवाने
विसरुनी कालची निराशा
मन भिडे जीवनास नव्याने ....!
------------------------------------------------------------
कविता - मन हे ...!
-अरुण वि .देशपांडे -पुणे..
मो-९८५०१७७३४२
----------------------------------------------------------

कविता - इथे ...!

कविता - इथे ...!
-अरुण वि .देशपांडे .
--------------------------------------------------
मन थिजले भावना गोठल्या
आपलेपणाचा बर्फ आत इथे 
वितळणार आता काहीच नाही
नजरेत फक्त गारठा इथे ...!
मित्र सोबती ना राहिले इथे
सावल्या त्यांच्या त्या बेभरोसी
निसरडे झाले ते हमरस्ते
सरळ सध्या वाट्या लुप्त इथे ...!
बातमी - पत्र वर्तमानाचे आता
भयकारी भाविष्य चाहूल देते
स्थिरता ना उरली जगण्यात
अंदाज ना काय घडेल उद्या इथे ?
---------------------------------------------
कविता - इथे ...!
-अरुण वि.देशपांडे -पुणे .
---------------------------------------------------

कविता - वाटचाल ही ...!

_कविता- वाटचाल ही..!
_अरूण वि.देशपांडे.
______________________________
कितीक योजने चालुन झाले अंतर सारे
परी आणिक आहे करणे वाटचाल पुढची
उगवती हर एक नवी पहाट ही रोजची
भरते उमेद नवविश्वासाच्या वाटचालीची
थकल्या भागल्या जीवा आधार देण्यास
शितल चांदणे देती तारे सारे आकाशाची
बदलो कितीदाही दुनिया नजरे समोरची
ईच्छा मनात कणखर वाट पूर्ण करण्याची!
_______________________________
कविता_ वाटचाल ही..!
_ अरूण वि .देशपांडे
_______________________________

कविता - भाव मनीचे ..!

कविता - भाव मनीचे …!
-अरुण वि  देशपांडे .
-----------------------------------------------
जुळवाजुळवी ती शब्दांची
सोपी असते ?, मुळीच नाही
असेल समजदार समोरचा
अशी खात्री देता येत नाही…!

सांगणे तसे सारेच कुणा
कधी रडगाणे ना ठरावे
काय सांगावे ,नि काय नाही
हे ज्याचे त्यानेच ठरवावे …!

बोजड अपेक्षांचे ओझे ते
आत साठवणे बिनकामी
समोरच्या मनात प्रतिमा
नसावी कधी ती कुचकामी …!

भाव भावना व्यक्त करणे
ओढ असते हरेक मनाची
आठवणी असतात याच्या
गुंतवणूक हो हीच मनाची …!
------------------------------------
 कविता - भाव मनीचे …!
-अरुण वि  देशपांडे .
----------------------------------------

Monday, September 7, 2015

कविता - अटळ हे जगणे ..!

कविता - अटळ हे जगणे …!
-अरुण वि . देशपांडे .
-------------------------------------------------------------------
होते जरी  घालमेल  रोजच  या जीवाची
अटळ जगणे आम्हासी  जगावे लागत आहे   ।।

दुसऱ्या दुनियेत  मात्र सदा आलबेल आहे
नाही नाही त्या गोष्टींना बघावे लागत आहे  ।।

स्व: वर लुब्ध झालेल्या लब्ध -प्रतिष्ठितांचे
जगणे बेगडी तरी ते पहावे लागत आहे  .        ।।

चाड नाही उरली जगात मूल्यवान नीतींची
संस्कार फुले पायदळी  पहावी लागत आहे.      ।।

तुंबड्या  भरण्याची तृष्णा भागत नाही तरी
दिसेल ते लुटणाऱ्याना  पहावे लागत आहे .     ।।

लढण्याची जिद्द विरोधात जे बाळगुनी आहे
सोबत्या अभावी पीछेहाट पहावी लागत आहे.      ।।

माणूस हा  जणू एक सरडा ,नित्य रंग बदली
चक्रावणारे रूप  निमूट पाहावे लागत आहे.          ।।

आहे बिकट जरी सारे ,मन आशावादी आहे
अटळ जगणे सारे जगावे लागत आहे  .             ।।
------------------------------------------------------------------------------------
कविता - अटळ हे जगणे …!
-अरुण वि . देशपांडे
-------------------------------------------------------------

Saturday, June 27, 2015

कविता - नशिबास वेळ हो मिळेना ..!

कविता - , नशिबास वेळ हो मिळेना ....!
-अरुण वि. देशपांडे -पुणे .
---------------------------------------------------------------------------------------------
वेदना -दुख: यातनांची रात्र सरता सरेना
भोग असे हे नशिबात का माझ्या ? काही कळेना  ||

मान्य आहे  मजला .सुख- दुखः या जीवनाच्या बाजू
सुख दाखविते  वाकुल्या ,दुखः  ते पळता पळेना     ||

अंधार असतो म्हणे ,  आपला पाहुणा हा रात्रीचा
बसला इथेच हा ,सकाळ  झाली कधी ? ते कळेना      ||

येईल अशी एक ,जी असेल पहाट माझ्यासाठी
जीव आला कंठाशी आता , वेळ येण्याची ती जुळेना   ||

का व्यर्थ शोक करिसी असा ,? विचारता कुणी , सांगे
भले करण्या माझे, नशिबास वेळ हो मिळेना ....!    ||
------------------------------------------------------------------------------------------
कविता - , नशिबास वेळ हो मिळेना ....!
-अरुण वि. देशपांडे -पुणे .
---------------------------------------------------------------------------------------------

Wednesday, June 3, 2015

आजच्या - ०३ जून -२०१५ - दिव्य -मराठी -किड्स -कॉर्नर.-मध्ये प्रकाशित बाल-कविता ---------- - कठीण समयी ..!-

रसिक-मित्र हो -नमस्कार
आजच्या - ०३ जून -२०१५ -
दिव्य -मराठी -किड्स -कॉर्नर.-मध्ये प्रकाशित बाल-कविता
-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------
बाल-कविता - कठीण समयी ..!-
अरुण वि.देशपांडे -पुणे.
-------------------------------------------------------------------------
गोड बोलण्याने
छान वागण्याने
मित्र होती सारे
सहजपणे ....!

वात दिव्याची ही
सारिते अंधारा
करिते उजेड
भोवताली ...!
मदत अशीही
आपण करावी
असे जो कुणी
अडचणीत ...!
सोबती असावे
कठीण समयी
सुखाचे सोबती
काय कामाचे .?
---------------------------------------------------------------------------------------
बाल-कविता - कठीण समयी ..!-
अरुण वि.देशपांडे -पुणे..
मो- ९८५०१७७३४२ .
-------------------------------------------------------------------------------------